कोरोना महामारी की वजह से आई वर्तमान अनिश्चित्ता केवल स्वास्थ्य से जुड़ी नहीं है, बल्कि इसने वित्तीय तौर पर भी नुकसान किया है. 6 महीने की लोन मोरेटोरियरम की अवधि 31 अगस्त 2020 को खत्म हुई है. जब मोरेटोरियम की अवधि जारी थी, तब भी टेन्योर को और बढ़ाने, मोरेटोरियम की अवधि के दौरान ब्याज लगाने और इसके द्वारा हो रही कुल वित्तीय अस्थिरता को लेकर अलग-अलग बातें थीं. सुप्रीम कोर्ट तक बात पहुंचकर, अनिश्चित्ता अभी भी सामान्य कर्जधारक के दिमाग में बनी हुई है. आइए लोन मोरेटोरियरम पर आरबीआई की नई गाइडलाइंस के बारे में जानते हैं और कर्जधारक के पास वर्तमान में क्या विकल्प हैं. वर्तमान में कानूनी स्थिति मोरेटोरियम की अवधि की पहले बीत चुकी 31 अगस्त 2020 की डेडलाइन से आगे बढ़ने की कोई उम्मीद नहीं है. रियायत को शुरुआत में अच्छी तरह लिया गया था लेकिन बाद में उसकी चमक खोती गई. मोरेटोरियम एक समय में ऐसी स्थिति पर आ गया, जब वे बैंक और NBFC के वित्तीय कामकाज में बाधा डाल रहा था और अस्थिरता और कैश की किल्लत कर रहा था. कर्जधारकों को भी ज्यादा फायदा नहीं हो रहा था क्योंकि उनकी ब्याज की लायबिलिटी कंपाउंड हो रही...
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