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In Q4 earnings, IT, auto, retail could be winners; banks, pharma to lag

The recovery in earnings that India Inc witnessed last quarter is expected to broadly sustain this time around as well. We expect the Nifty to clock a percentage earnings growth in the low double digits for FY18, thereby breaking free from a three-year long phase of earnings stagnation. As a sector, information technology was a surprise winner last quarter, and is expected to continue its winning streak in the March quarter as well. However, commentary and guidance are seen assuming greater importance than earnings numbers. The other winning sectors are likely to be discretionary consumption plays like automobile and retail, select pockets in industrial sectors like roads and railways, and metals and mining, as well as non- banking finance companies.

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इन ट्रांजैक्‍शन पर है मोदी सरकार की नजर, रहें अलर्ट

10 लाख रुपए कैश डिपॉजिट की जानकारी नियमों के तहत अगर आप बैंक में एक फाइनेंशियल ईयर में एक या कई अकाउंट में कुल 10 लाख रुपए या इससे अधिक कैश जमा कराते हैं तो इस बात की जानकारी बैंक इनकम टैक्‍स विभाग को देगा। इसके आधार पर इनकम टैक्‍स विभाग आपसे इस पैसे का सोर्स पूछ सकता है। आगे की स्‍लाइड में जानें 10 लाख रुपए फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट पर क्‍या होगा 10 लाख रुपए फिक्‍स डिपॉजिट अगर कोई व्‍यक्ति एक फाइनेंशियल ईयर में 10 लाख रुपए या इससे अधिक फिक्‍स्ड डिपॉजिट कराता है तो बैंक को इसकी जानकारी इनकम टैक्‍स डिपॉर्टमेंट को देनी होगी। ऐसे में किसी के लिए भी इनकम टैक्‍स रिटर्न में अपनी इनकम को कम दिखाना महंगा पड़ सकता है। 1 लाख रुपए क्रेडिट कार्ड बिल का कैश पेमेंट बैंक को 1 लाख रुपए इससे अधिक के क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट की जानकारी भी इनकम टैक्‍स विभाग को देनी होगी। इसके अलावा एक फाइनेंशियनल ईयर में 10 लाख रुपए या इससे अधिक का क्रेडिट कार्ड ड्यू सेटल करने के लिए किसी भी मोड चेक, ऑनलाइन या कैश से किए गए पेमेंट की जानकारी बैंक को इनकम टैक्‍स विभाग को देनी होगी। 2.5 लाख रुपए कैश डिपॉजिट इनकम टैक...

मार्च में MF इन्वेस्टर्स ने निकाले 50 हजार Cr, इक्विटी में इन्वेस्टमेंट 20 माह के लो पर

निवेशकों ने मार्च 2018 में म्‍युचुअल फंड से 50 हजार करोड़ रुपए से ज्‍यादा पैसा निकाल लिया है। सबसे ज्‍यादा पैसा लिक्विड और डेट फंड से निकाला गया है। यह जानकारी एम्‍फी की तरफ से जारी आंकड़ों में सामने आई है। इसके अनुसार इक्विटी फंड में 20 महीने में सबसे कम निवेश इस बार मार्च में आया है। यह निवेश 2954 करोड़ रुपए रहा है। जानकार इसे मोदी सरकार की तरफ से बजट में लाए गए 10 फीसदी लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गैन टैक्‍स (LTCG) का असर भी बता रहे हैं। इक्विटी फंड का बुरा रहा हाल मार्च 18 में इक्विटी फंड में 2,954 करोड़ रुपए का ही निवेश आया है। यह निवेश पिछले 20 माह में किसी महीने आए निवेश में सबसे कम है। इससे पहले जुलाई 2016 में 2221 करोड़ रुपए का निवेश आया था। जानकारों की राय है कि इक्विटी फंड में निवेश में यह कमी बजट में लागू किए गए टैक्‍स के नए नियम हैं। इनके तहत 10 फीसदी लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गैन टैक्‍स (LTCG) लगाया गया है। किसी भी निवेशक को अगर अब 1 लाख रुपए से ज्‍यादा का LTCG का फायदा होता है, तो उसे यह टैक्‍स देना होगा। शेयरखान के निदेशक इन्‍वेस्‍टमेंट सॉल्‍यूशन स्‍टीफन के अनुसार नए टैक्‍स नियमों ...